ncfc का वार्षिक व्यवसायिक लक्ष्य

(01 जुलाई 2008 से 30 जून 2009 तक )
न्यूनतम वार्षिक विक्रय लक्ष्य रुपये 200 करोड़
(1) मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश तथा उत्तराखंड के जिला / तहसील स्तर तक कम से कम 2000 स्थानीय वितरक नियुक्त करेगी |

(2) प्रत्येक स्थानीय वितरक से प्रारम्भ में न्यूनतम 1 लाख रुपए प्रतिमाह का सकल विक्रय ( विभिन्न उत्पादों का ) लक्ष्य निर्धारित होगा, इस प्रकार 1 तहसील स्तरीय स्थानीय वितरक मौसम तथा बाजार के उतार-चढ़ाव के उपरांत न्यूनतम 10 लाख शुद्ध विक्रय प्रति वर्ष करेगा | ( जबकि बड़ी तहसीलों में / क्षेत्रो में 10 लाख मासिक विक्रय तक Practical में होगा | )

(3) ncfc को समस्त कमीशन ( लाभांश ), फील्ड कर्मचारियों के वेतन भत्ते, ट्रांसपोटेशन, टेक्सेशन तथा अन्य स्थानीय प्रारंभिक विज्ञापन, प्रचार- प्रसार, व्यय आदि सहित सकल व्ययों के समायोजन उपरांत न्यूनतम 10 प्रतिशत शुद्ध लाभ प्राप्त होता है चूँकि ncfc का मुख्य उद्देश्य " डेयरी को उद्योग " के रूप में स्थापित करवा कर कृषि के समतुल्य दर्जा दिलवाना है इसलिए इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक कर्तव्यों / दायित्वों का निर्वाहन मुख्य है तथा लाभार्जन गौण है, इसलिए ncfc अपने शुद्ध लाभ में से न्यूनतम 50% जन जागरूकता कार्यक्रमों के क्रियान्वय तथा इस हेतु विज्ञापन ( इलेक्ट्रोनिक मीडिया तथा प्रिंट मीडिया पर ) गोष्ठियों पुरुस्कारों ( डेयरी को प्रोत्साहन हेतु पुरुस्कार ) पर निम्नानुसार व्यय करेगी |

Estimate ( Average Basis )
एक स्थानीय वितरक से शुद्ध वार्षिक लाभांश प्रतिवर्ष रुपये 1 लाख |

2000 वितरकों का औसत
                         Rs. 100000 X 2000 वितरक = 200000000/- (बीस करोड़ रुपए)

लाभांश का 50% अर्थात 10 करोड़ का व्यय ( जनजागरूकता कार्यक्रमों हेतु) निम्नानुसार होगा -
(1) प्रिंट मीडिया पर - 2.5 करोड़ वार्षिक
(2) इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर - 2.5 करोड़ वार्षिक
(3) गोष्टियों पर - 2.0 करोड़ वार्षिक
(4) पुरुस्कारों पर - 1.0 करोड़ वार्षिक
(5) अन्य मदों पर ( लगभग ) - 1.0 करोड़ वार्षिक
(6) उक्त मदों पर आकस्मिक प्रतिपूर्ति हेतु Reserve - 1.0 करोड़ वार्षिक
                                                                                                             कुल - 10,0000000/- ( दस करोड़ रुपये मात्र )
नोट:- इसके अतिरिक्त भी आकस्मिक आवश्यकता हेतु ncfc अपने लाभांश का कुछ और भाग ( Part ) भी विनियोजित कर सकती है, क्योकि ncfc का उद्देश्य- डेयरी को उद्योग के रूप में स्थापित करवा कर कृषि के समतुल्य दर्जा दिलवाना है | लाभार्जन गौण ( Secondary ) है |